कानपुर में डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी गिरोह का खुलासा, 48.20 लाख की ठगी में 3 आरोपी गिरफ्तार
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर थाना पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने स्वरूपनगर निवासी 76 वर्षीय योगेश चंद्र मिश्रा को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बनकर फोन किया और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर करीब 48.20 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए।
मुंबई क्राइम ब्रांच और CBI अधिकारी बनकर किया फोन
पुलिस के अनुसार, 10 सितंबर को योगेश चंद्र मिश्रा के मोबाइल पर फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार से जुड़ा एक मोबाइल नंबर कथित तौर पर मुंबई में आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद कॉल को कथित तौर पर मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई अधिकारियों के पास ट्रांसफर किया गया।
आरोपियों ने पीड़ित को गंभीर अपराधों में संलिप्त होने और उनके खिलाफ मामला दर्ज होने की बात कही। इसके साथ ही गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी गई। आरोपियों ने WhatsApp के जरिए सीबीआई और इंटरपोल से संबंधित बताए गए फर्जी दस्तावेज भी भेजे, जिससे पीड़ित पर दबाव बनाया गया।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 48.20 लाख रुपये ट्रांसफर
पुलिस के मुताबिक, ठगों ने जांच के नाम पर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट कर लिया और उन्हें लगातार फोन एवं वीडियो कॉल पर निगरानी में रहने के लिए कहा। उन्हें परिवार और अन्य लोगों से संपर्क नहीं करने की हिदायत दी गई।
आरोपियों ने कथित जांच और वेरिफिकेशन के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई। इस तरह पीड़ित से करीब 48 लाख 20 हजार रुपये की ठगी की गई। पुलिस की जांच में सामने आया कि पीड़ित ने एक करोड़ रुपये की एफडी तुड़वाने के लिए बैंक से संपर्क किया था। बैंक कर्मचारियों को मामला संदिग्ध लगा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और जांच आगे बढ़ी।
फर्जी कंपनी के नाम पर खुलवाया बैंक खाता
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर BAUKOYO CONTRACTORS PRIVATE LIMITED नाम की फर्म तैयार कर उसके नाम से बैंक खाता खुलवाया था।
पुलिस के अनुसार, इस खाते में करीब 25.98 लाख रुपये 15 अलग-अलग लेनदेन के जरिए जमा हुए। इसके बाद रकम को उसी दिन अलग-अलग राज्यों के करीब 611 बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस अब इन बैंक खातों और रकम के पूरे लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
साइबर थाना पुलिस ने मामले की जांच और सर्विलांस के आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वासु, आतिश कुमार और कंचन प्रजापति के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का एक अन्य आरोपी मुकुल चौबे फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने में किया गया था। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और बैंक खातों की भी जानकारी जुटा रही है।
मोबाइल और WhatsApp चैट समेत डिजिटल साक्ष्य बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन से बैंक खातों की जानकारी, फर्जी दस्तावेज, कॉल रिकॉर्ड, WhatsApp चैट समेत कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। NCRP पर की गई जांच में इन खातों से जुड़े अन्य साइबर अपराधों की शिकायतें भी सामने आई हैं।
पुलिस के मुताबिक, अब तक की जांच में करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े मामलों का पता चला है। इन मामलों में रकम को कई स्तरों पर अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस कर रही पूरे नेटवर्क की जांच
कानपुर साइबर थाना पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों से कितने बैंक खाते खुलवाए गए और इन खातों के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
साइबर ठगी के इस मामले में पुलिस मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, WhatsApp चैट और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कर रही है। फरार आरोपी मुकुल चौबे की तलाश भी जारी है।