यूपी MLC चुनाव 2026: BJP-सपा ने बिछाई सियासी बिसात, 2027 से पहले जातीय समीकरणों की परीक्षा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) चुनाव 2026 की अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 11 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर, नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
इन चुनावों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की संगठनात्मक तैयारी और रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इन सीटों के मतदाता सामान्य विधानसभा चुनाव के मतदाताओं से अलग होते हैं। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत स्नातक तथा शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं।
BJP ने छह और उम्मीदवारों के नाम घोषित किए
भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश की छह सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। पार्टी ने वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक से दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी स्नातक से अशोक कुमार राठौर को मैदान में उतारा है।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में वाराणसी से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया गया है।
इससे पहले BJP पांच सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी थी। इनमें लखनऊ स्नातक से अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक से मानवेंद्र प्रताप सिंह, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक से हरि सिंह ढिल्लों, लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक से श्रीचंद शर्मा के नाम शामिल हैं।
सपा ने सभी 11 सीटों पर उतारे उम्मीदवार
समाजवादी पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश की सभी 11 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने अपने कुछ मौजूदा विधान परिषद सदस्यों को दोबारा मैदान में उतारा है। इनमें इलाहाबाद-झांसी स्नातक से मान सिंह यादव, वाराणसी स्नातक से आशुतोष सिन्हा और वाराणसी शिक्षक से लाल बिहारी यादव शामिल हैं।
सपा ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से कमलेश यादव और लखनऊ स्नातक सीट से पूर्व एमएलसी कांति सिंह को भी उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को प्रमुखता दिए जाने की बात सामने आई है।
जातीय समीकरण भी चर्चा में
MLC चुनाव में BJP और सपा के उम्मीदवारों के चयन को दोनों दलों की व्यापक सामाजिक और राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। BJP के घोषित उम्मीदवारों में मौजूदा सदस्यों को दोबारा मौका देने के साथ नए चेहरों को भी शामिल किया गया है।
वहीं सपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों में पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक गठजोड़ पर जोर देने की रणनीति की चर्चा है। यह पार्टी की ओर से अपनाई जा रही व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया गया है।
सपा के सामने विधान परिषद में संख्या बनाए रखने की चुनौती
उत्तर प्रदेश की 100 सदस्यीय विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए किसी दल के पास कम से कम 10 सदस्य होना जरूरी है। मौजूदा समय में सपा के पास 10 एमएलसी हैं। इस चुनाव में सपा के तीन मौजूदा सदस्यों वाली सीटों पर भी मतदान होना है।
इसी वजह से इन चुनावों का सपा के विधान परिषद में संख्याबल पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि चुनाव स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में होते हैं और सामान्य विधानसभा चुनाव से इनका मतदाता आधार अलग है।
BJP के सामने संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की चुनौती
BJP के नेतृत्व वाले NDA के पास विधान परिषद में स्पष्ट बहुमत है। इसके बावजूद स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव का स्वरूप अलग होने के कारण उम्मीदवारों को स्थानीय संगठन, मतदाता संपर्क और संबंधित पेशेवर समूहों के बीच नेटवर्क पर निर्भर रहना होगा।
BJP ने अपने उम्मीदवारों के चयन में पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों को शामिल किया है। पार्टी की ओर से तीन मौजूदा एमएलसी को भी दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को नतीजे
उत्तर प्रदेश MLC चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हो गई है। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे।
23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को की जाएगी। मौजूदा एमएलसी सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त हो रहा है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम राजनीतिक मुकाबला
MLC चुनाव का दायरा विधानसभा चुनाव से अलग है, लेकिन राजनीतिक दल इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारी, मतदाता संपर्क और सामाजिक समीकरणों को परखने के अवसर के तौर पर देख रहे हैं। इसके साथ ही उम्मीदवारों के प्रदर्शन का असर विधान परिषद में दोनों प्रमुख दलों के संख्याबल पर भी पड़ेगा।
इसलिए 11 सीटों का यह चुनाव केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि BJP और सपा की चुनावी तैयारियों तथा उनके घोषित सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।