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तुर्की भारत डीजल आयात: रूस से सप्लाई घटते ही भारत से रिकॉर्ड खरीद

By yogesh jindoria | Published: Sep 22, 2026 11:12 AM

तुर्की भारत डीजल आयात: रूस से सप्लाई घटते ही भारत बना नया फ्यूल सोर्स

नई दिल्ली: रूस से डीजल की सप्लाई में आई बड़ी गिरावट के बीच तुर्की ने भारत से ईंधन खरीद बढ़ा दी है। अगस्त 2026 में तुर्की ने भारत से रिकॉर्ड मात्रा में डीजल आयात किया। कमोडिटी डेटा फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में तुर्की की भारत से डीजल खरीद 1.20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रही। यह Kpler के 2017 से उपलब्ध आंकड़ों में भारत से तुर्की की सबसे बड़ी मासिक खरीद है।

रूस से डीजल खरीद में तेज गिरावट

तुर्की लंबे समय से डीजल के लिए रूस पर काफी निर्भर रहा है, लेकिन अगस्त में तस्वीर तेजी से बदली। Kpler के अनुसार, तुर्की की रूस से डीजल खरीद अगस्त में घटकर करीब 80 हजार बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि 2026 की शुरुआत के महीनों में यह मात्रा 2 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रही थी। जुलाई में भी रूसी सप्लाई करीब 1 लाख बैरल प्रतिदिन थी।

इस गिरावट का असर तुर्की के कुल ईंधन आयात में रूस की हिस्सेदारी पर भी पड़ा। अगस्त में रूसी डीजल की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी रह गई। इसके मुकाबले 2025 में रूस तुर्की के डीजल आयात का करीब 85 फीसदी हिस्सा सप्लाई करता था।

रूस ने क्यों घटाई डीजल सप्लाई?

रूस की कई रिफाइनरियों को यूक्रेनी ड्रोन हमलों से नुकसान पहुंचा है। इससे घरेलू ईंधन उत्पादन और आपूर्ति पर दबाव बढ़ा। घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए मॉस्को ने डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया। अगस्त के दौरान यह प्रतिबंध लागू रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी डीजल की उपलब्धता प्रभावित हुई। सितंबर में भी निर्यात प्रतिबंध जारी रहने की रिपोर्ट सामने आई है।

इसके अलावा मध्य पूर्व में संघर्ष और तेल रिफाइनरियों को हुए नुकसान तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए शिपिंग में आई बाधाओं ने भी ईंधन की वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित किया। ऐसे माहौल में तुर्की के आयातकों को रूस के अलावा दूसरे स्रोतों से डीजल खरीदना पड़ा।

भारत और अमेरिका से बढ़ी खरीद

रूस से सप्लाई घटने के बाद तुर्की ने भारत के साथ-साथ अमेरिका से भी डीजल खरीद बढ़ाई। Kpler के मुताबिक अगस्त में अमेरिका से तुर्की को डीजल की सप्लाई करीब 90 हजार बैरल प्रतिदिन रही। भारत और अमेरिका दोनों से अगस्त की खरीद Kpler के उपलब्ध आंकड़ों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची।

हालांकि अलग-अलग डेटा एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है। Energy Aspects ने अगस्त में भारत से तुर्की को डीजल की सप्लाई करीब 74 हजार बैरल प्रतिदिन आंकी है। इसके बावजूद यह आंकड़ा 2022 के बाद भारत से तुर्की को हुई सबसे ऊंची मासिक सप्लाई में शामिल है।

भारत क्यों बना तुर्की का विकल्प?

भारत के पास बड़ी रिफाइनिंग क्षमता है और वह पेट्रोलियम उत्पादों का महत्वपूर्ण निर्यातक है। ऐसे समय में जब रूस और मध्य पूर्व से सप्लाई प्रभावित हुई, भारतीय रिफाइनरियों से उपलब्ध डीजल तुर्की के लिए वैकल्पिक स्रोत बन गया।

भारत से तुर्की की खरीद में हुई तेजी वैश्विक तेल बाजार में बदलते सप्लाई पैटर्न को भी दिखाती है। रूस से उपलब्धता घटने पर तुर्की जैसे बड़े ईंधन आयातक को दूसरे देशों से सप्लाई जुटानी पड़ी। इस बदलाव में भारत की रिफाइनिंग और निर्यात क्षमता की भूमिका बढ़ी है।

भारत के लिए क्या मायने रखता है?

तुर्की की बढ़ी हुई खरीद भारतीय रिफाइनरियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अतिरिक्त मांग का संकेत है। हालांकि, ईंधन व्यापार केवल उत्पादन क्षमता पर निर्भर नहीं करता। शिपिंग लागत, बीमा, कच्चे तेल की कीमत और विभिन्न देशों में उपलब्धता जैसे कारक भी निर्यात को प्रभावित करते हैं।

अगस्त के आंकड़े यह भी बताते हैं कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में किसी एक प्रमुख सप्लायर पर निर्भरता कम होने के साथ व्यापारिक रास्ते तेजी से बदल सकते हैं। तुर्की के मामले में रूस से घटती डीजल सप्लाई के बीच भारत और अमेरिका से बढ़ा आयात इसी बदलाव का उदाहरण है।

फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रूस की डीजल निर्यात पाबंदियां कितने समय तक जारी रहती हैं और प्रतिबंध हटने के बाद तुर्की की भारत से ईंधन खरीद किस स्तर पर रहती है।

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