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Tehri Hydropower Asset Dispute: UP-उत्तराखंड के बीच 14 साल पुराना विवाद, SC ने सुझाया बातचीत का रास्ता

By yogesh jindoria | Published: Sep 21, 2026 12:47 PM

नई दिल्ली: टिहरी हाइड्रोपावर की संपत्तियों को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच चल रहे करीब 14 साल पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को आपसी बातचीत से समाधान तलाशने का सुझाव दिया है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या इस मामले को मध्यस्थता के लिए भेजकर विवाद सुलझाने का रास्ता अपनाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी।

2001 में उत्तर प्रदेश के बंटवारे से जुड़ा विवाद

मामले की जड़ उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन से जुड़ी है। वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य बना और इसके बाद दोनों राज्यों के बीच संपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े कई मुद्दे सामने आए।

उत्तराखंड का दावा है कि टिहरी हाइड्रोपावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) से जुड़ी कुछ संपत्तियां और हिस्सेदारी बंटवारे के दौरान उत्तर प्रदेश के हिस्से में चली गईं, जबकि संबंधित परियोजना उत्तराखंड में स्थित है। इसी आधार पर उत्तराखंड इन संपत्तियों पर अपना दावा करता रहा है। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी THDC की हिस्सेदारी और उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत उसके बंटवारे से जुड़े कानूनी सवाल दर्ज हैं।

2012 से अदालत में चल रहा मामला

उत्तराखंड की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि इस विवाद को लेकर मुकदमा वर्ष 2012 से चल रहा है। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि मामले में दूसरी तरफ से दस्तावेज और सबूत दाखिल करने में लगातार देरी हुई है।

उत्तराखंड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अमित आनंद तिवारी ने अदालत को बताया कि वर्ष 2019 में मामले में 30 लाख रुपये की लागत लगाई गई थी। इसके बावजूद मामले में आगे की प्रक्रिया को लेकर समय मांगा गया।

अटॉर्नी जनरल की राय का भी जिक्र

सुनवाई के दौरान उत्तराखंड की ओर से उस समय के अटॉर्नी जनरल की राय का भी हवाला दिया गया। राज्य का कहना है कि उसकी ओर से संपत्तियों पर किया गया दावा उचित यानी ‘जस्टिफाएबल क्लेम’ माना गया था।

हालांकि, उत्तराखंड का कहना है कि संपत्तियों के विवाद का अंतिम समाधान सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही हो सकता है। इस पर अदालत ने दोनों राज्यों के बीच बातचीत के जरिए समाधान की संभावना पर विचार करने को कहा।

SC ने पूछा- क्या बातचीत से सुलझ सकता है मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि विवाद दो राज्यों के बीच है। ऐसे में अदालत के अंतिम निर्णय से पहले यह देखना उचित होगा कि क्या दोनों राज्य आपसी बातचीत के जरिए किसी समाधान तक पहुंच सकते हैं।

अदालत ने यह भी पूछा कि क्या मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा जा सकता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने बताया कि उन्होंने उत्तराखंड के अटॉर्नी जनरल से बातचीत की है और दोनों राज्यों के बीच बातचीत की संभावना देखी जा सकती है।

28 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। अगली तारीख पर दोनों राज्यों की ओर से यह बताया जा सकता है कि क्या वे आपसी बातचीत या मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

फिलहाल अदालत ने संपत्तियों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और दोनों राज्यों के दावों तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों पर आगे सुनवाई होनी है।

विवाद का कानूनी पक्ष

सुप्रीम कोर्ट के पहले के रिकॉर्ड में इस मामले से जुड़े कई कानूनी सवाल तय किए जा चुके हैं। इनमें उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत THDC की हिस्सेदारी के बंटवारे और उत्तराखंड के संभावित 25 प्रतिशत इक्विटी शेयर के दावे से जुड़े प्रश्न भी शामिल हैं।

 

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