जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन ‘विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा के लिए वित्तपोषण’ में हिस्सा लिया। केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्तीय विकास, नीतिगत प्राथमिकताओं और आर्थिक विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने पर चर्चा की गई।
J&K के लिए वित्तीय रास्ते तैयार करने पर जोर
मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, उमर अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श से जम्मू-कश्मीर के लिए स्पष्ट वित्तीय रास्ते तैयार करने में मदद मिलेगी। इसमें वृहद आर्थिक विकास, कृषि क्षेत्र में बदलाव और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
इन क्षेत्रों में वित्तीय रणनीतियों के जरिए टिकाऊ और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। जम्मू-कश्मीर के लिए कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण हिस्सों के रूप में देखा गया है।
सम्मेलन में कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 18 और 19 सितंबर को नई दिल्ली में इस सम्मेलन का आयोजन किया है। इसमें विभिन्न राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, वित्त सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
सम्मेलन का उद्देश्य 2047 तक भारत के विकास लक्ष्य से जुड़े वित्तीय मुद्दों और नीतिगत प्राथमिकताओं पर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। इसमें विकास योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने और राज्यों के साथ नीतिगत तालमेल बढ़ाने पर विचार किया गया।
तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा
सम्मेलन के एजेंडे में तीन प्रमुख विषय शामिल रहे—वृहद आर्थिक परिदृश्य, कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए वित्तपोषण और ऊर्जा संक्रमण के लिए वित्तपोषण। इसके अलावा निजी क्षेत्र से वित्त जुटाने, GST से जुड़े राज्यों पर प्रभाव और नवीकरणीय ऊर्जा तथा ट्रांसमिशन परियोजनाओं के वित्तपोषण जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा रहे।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन में विकास यात्रा के लिए सरकारी बजट के साथ-साथ निजी निवेश और नए वित्तीय तरीकों की भूमिका पर भी विचार किया गया।
कृषि और रिन्यूएबल एनर्जी पर J&K का फोकस
उमर अब्दुल्ला की भागीदारी में जम्मू-कश्मीर के लिए मैक्रोइकोनॉमिक ग्रोथ, कृषि परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा को प्रमुख क्षेत्रों के तौर पर रेखांकित किया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार इन क्षेत्रों में बेहतर वित्तीय रास्ते तैयार होने से जम्मू-कश्मीर में टिकाऊ और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों और केंद्र के बीच वित्तीय नीतियों को लेकर अनुभव साझा करने तथा विकास परियोजनाओं के लिए संभावित वित्तीय विकल्पों पर विचार-विमर्श किया गया।
इस सम्मेलन में उमर अब्दुल्ला की भागीदारी जम्मू-कश्मीर से जुड़े आर्थिक और वित्तीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर की नीति चर्चा में रखने का अवसर रही। सम्मेलन का समापन 19 सितंबर को होना निर्धारित है।