लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खराब क्वालिटी पर NHAI का एक्शन, PNC इंफ्राटेक पर 3 साल का प्रतिबंध
लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में सामने आई खामियों और सड़क के कई हिस्सों में समय से पहले खराबी के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त कार्रवाई की है। NHAI ने एक्सप्रेसवे की कंसेशनायर कंपनी PNC Infratech और उसकी सहायक कंपनी अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड को तीन साल के लिए अपनी नई परियोजनाओं की बोली प्रक्रिया से प्रतिबंधित कर दिया है। यह कार्रवाई ठेके की शर्तों के तहत उपलब्ध कड़े दंडों में शामिल है। NDTV India+1
प्रतिबंध की अवधि में कंपनी NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और संबंधित एजेंसियों की नई परियोजनाओं के टेंडर में बोली नहीं लगा सकेगी। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी के पहले से चल रहे और मौजूदा प्रोजेक्ट इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे। NDTV India
एक्सप्रेसवे खुलने के कुछ ही समय बाद सामने आईं खामियां
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उस समय उठे जब एक्सप्रेसवे शुरू होने के कुछ ही समय बाद सड़क के कई हिस्सों में गड्ढे, क्षति और धंसने की शिकायतें सामने आईं। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के करीब 26 दिनों के भीतर 74 स्थानों पर गड्ढे और सड़क क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आई थीं। NDTV India
रिपोर्टों के अनुसार, किलोमीटर संख्या 64 के आसपास सड़क धंसने की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण और इस्तेमाल की गई तकनीक व सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे।
NHAI ने बनाई तकनीकी कमेटी
मामले की जांच के लिए NHAI ने तकनीकी कमेटी गठित की है। कमेटी का काम एक्सप्रेसवे पर सामने आई खामियों की तकनीकी वजहों की जांच करना और यह निर्धारित करना है कि सड़क के निर्माण में किन स्तरों पर कमी रही।
NHAI की कार्रवाई में निर्माण संबंधी खामियों और सड़क धंसने की घटनाओं को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। कंपनी के खिलाफ कार्रवाई से पहले संबंधित प्रक्रिया के तहत उसका पक्ष भी लिया गया। NDTV India
टोल से होने वाले नुकसान की भरपाई का मुद्दा
एक्सप्रेसवे पर सामने आई समस्याओं के चलते पूरे मार्ग पर फिलहाल टोल वसूली बंद होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, टोल बंद रहने से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी कंपनी पर डाली गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में NHAI की ओर से करीब 42 लाख रुपये प्रतिदिन के टोल राजस्व नुकसान की भरपाई मांगे जाने की बात कही गई है। The Times of India
कंपनी पर पहले भी हुई थी कार्रवाई
इससे पहले NHAI ने PNC Infratech के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करते हुए कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने की दिशा में कदम उठाए थे। कंपनी पर दो प्रतिशत का जुर्माना लगाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्टों में बताया गया था कि एक्सप्रेसवे में बार-बार सामने आ रही निर्माण संबंधी समस्याओं के चलते NHAI ने कंपनी के प्रदर्शन का तकनीकी मूल्यांकन शुरू कराया था। AajTak
एक्सप्रेसवे की हालत पर उठे सवाल
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को दोनों शहरों के बीच तेज और सुगम कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जाता है। ऐसे में इसके शुरू होने के कुछ ही समय बाद सड़क की सतह में खराबी और धंसने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए।
मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच तक भी पहुंचा, जहां एक्सप्रेसवे से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। NDTV India
PNC Infratech पर तीन साल का प्रतिबंध क्यों अहम?
NHAI द्वारा लगाया गया तीन साल का प्रतिबंध कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस अवधि में वह NHAI और संबंधित सरकारी एजेंसियों की नई परियोजनाओं के लिए बोली नहीं लगा सकेगी। इसे कंपनी के खिलाफ अनुबंध की शर्तों के तहत उपलब्ध अधिकतम अवधि वाला प्रतिबंध बताया गया है। The Times of India
कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद PNC Infratech के शेयर में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर में करीब 20 प्रतिशत तक की गिरावट आई। The Times of India
कंपनी के पास कानूनी विकल्प
रिपोर्टों के मुताबिक, PNC Infratech की ओर से NHAI की कार्रवाई के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार किए जाने की बात सामने आई है। अंतिम रूप से निर्माण में सामने आई खामियों की जिम्मेदारी और उनसे जुड़े तकनीकी कारणों का निर्धारण संबंधित जांच और प्रक्रिया के आधार पर होगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर NHAI की कार्रवाई के बाद अब तकनीकी कमेटी की जांच और आगे होने वाली मरम्मत व सुधार की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।