📅 Loading Date & Time...
होम > राज्य > न्यूज़

गोंडा हिरासत में मौत मामला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने RPF के दो कर्मचारियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

By yogesh jindoria | Published: Sep 17, 2026 03:06 AM

गोंडा हिरासत में मौत मामला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने RPF के दो कर्मचारियों की अग्रिम जमानत खारिज की

लखनऊ। गोंडा में संजय कुमार सोनकर की कथित हिरासत में मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के दो कर्मचारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की पीठ ने RPF के सब-इंस्पेक्टर करण सिंह यादव और कांस्टेबल अमित कुमार यादव की अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। Prabhasakshi+1

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर गंभीर टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि कोविड-19 महामारी का दौर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन हिरासत में मौतों का सिलसिला कम होता नहीं दिख रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों को अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत साबित करने के लिए साक्ष्य पेश करने की जिम्मेदारी होनी चाहिए। Jagran+1

क्या है गोंडा का पूरा मामला?

यह मामला गोंडा के किंकी गांव निवासी 35 वर्षीय संजय कुमार सोनकर की कथित हिरासत में मौत से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 28 सितंबर 2025 को मोतीगंज रेलवे स्टेशन क्षेत्र में गोंडा से गुवाहाटी जा रही एक मालगाड़ी से सरसों के तेल के छह डिब्बे चोरी हुए थे। इस मामले की जांच RPF कर रही थी और जांच के दौरान संजय सोनकर का नाम सामने आया था। Prabhasakshi+1

अभियोजन के मुताबिक, 4 नवंबर 2025 को RPF के कर्मचारी संजय सोनकर को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए। उसी दिन शाम करीब साढ़े चार बजे उसे जांच के सिलसिले में उसके गांव लाया गया और बाद में फिर अपने साथ ले गए।

अगली सुबह उसके भाई को जानकारी दी गई कि संजय का शव मुर्दाघर में है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि हिरासत के दौरान संजय के साथ मारपीट की गई, जिसके कारण उसकी मौत हुई। Prabhasakshi+1

RPF कर्मचारियों ने आरोपों से किया इनकार

अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुंचे करण सिंह यादव और अमित कुमार यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। दोनों की ओर से दावा किया गया कि उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।

उनके वकीलों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि रिपोर्ट में जांघ के ऊपरी हिस्से पर चोट और दोनों घुटनों पर खरोंच के निशान का उल्लेख है। बचाव पक्ष की दलील थी कि इन चोटों से मौत होने की संभावना नहीं थी। Prabhasakshi+1

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्ष आरोपों का समर्थन करते हैं या नहीं, इसका फैसला मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद किया जाएगा। अदालत ने इस स्तर पर दोनों RPF कर्मचारियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। Jagran+1

अदालत ने हिरासत में मौत के मामलों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं का सिलसिला कम होता नहीं दिख रहा है। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि हिरासत में मौत के मामलों में पुलिसकर्मियों की भूमिका और उनके आचरण से जुड़े आरोपों की जांच गंभीरता से की जानी चाहिए। Prabhasakshi+1

पहले भी खारिज हो चुकी थी अग्रिम जमानत

करण सिंह यादव और अमित कुमार यादव ने गोंडा के विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत के 4 अगस्त 2026 के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं। हाई कोर्ट ने अब दोनों की अपीलों को भी खारिज कर दिया है। Prabhasakshi+1

गोंडा हिरासत में मौत मामला अब हाई कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

Scroll to Top