गाजियाबाद में मियावाकी वृक्षारोपण और कूड़ा प्रबंधन की CDO ने की समीक्षा, 7 दिन में कार्य पूरा करने के निर्देश
गाजियाबाद: जनपद की ग्राम पंचायतों में मियावाकी पद्धति से कराए जा रहे वृक्षारोपण और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन एवं अपशिष्ट निस्तारण की प्रगति को लेकर मुख्य विकास अधिकारी ने समीक्षा बैठक की। 1 सितंबर 2026 को दुर्गावती सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी, गाजियाबाद श्री कुमार सौरभ (आईएएस) ने की।
बैठक में ग्राम पंचायतों में चल रहे मियावाकी वृक्षारोपण कार्य, भूमि संबंधी समस्याओं, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था और ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों को सभी लंबित कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने और योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए।
मियावाकी वृक्षारोपण कार्य की हुई समीक्षा
समीक्षा बैठक में जनपद की विभिन्न ग्राम पंचायतों में चयनित स्थलों पर मियावाकी पद्धति से किए जा रहे वृक्षारोपण कार्य की प्रगति की जानकारी ली गई। इस दौरान कई स्थानों पर भूमि से संबंधित समस्याएं सामने आईं।
मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ ने भूमि संबंधी प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को उपजिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर इन मामलों का शीघ्र निस्तारण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी समस्याओं के कारण वृक्षारोपण कार्य में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
7 दिन में सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश
मुख्य विकास अधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों और सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत) को निर्देशित किया कि मियावाकी वृक्षारोपण से संबंधित सभी तैयारियां और अवशेष कार्य निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप अगले 7 दिनों के भीतर प्रत्येक दशा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें।
उन्होंने अधिकारियों को कार्य की नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर पूरा कराया जाए।
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की बनेगी प्रभावी रणनीति
बैठक में जनपद की बड़ी ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक रणनीति तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि गांवों में कूड़ा संग्रहण और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था केवल शुरू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे लंबे समय तक प्रभावी ढंग से संचालित करने की व्यवस्था भी विकसित की जानी चाहिए।
परियोजना को Self-Sustainable बनाने पर जोर
मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी व्यवस्था इस तरह विकसित की जाए कि परियोजना Self-Sustainable यानी स्वयं टिकाऊ बन सके।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को संचालित करने में ग्राम पंचायतों पर अनावश्यक वित्तीय भार न पड़े। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक और टिकाऊ मॉडल तैयार करने पर जोर दिया गया।
SLWM की अवशेष धनराशि की भी समीक्षा
बैठक के दौरान ग्राम पंचायतों में Solid Liquid Waste Management (SLWM) के अंतर्गत उपलब्ध अवशेष धनराशि की भी समीक्षा की गई।
मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपलब्ध धनराशि का नियमानुसार परीक्षण किया जाए और नियमों के अनुरूप उसका यथाशीघ्र व्यय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े आवश्यक कार्यों को गति दी जानी चाहिए।
अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को मियावाकी वृक्षारोपण और ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों में आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं में समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित की जाए और कार्यों की नियमित समीक्षा के साथ-साथ स्थलीय अनुश्रवण भी किया जाए। अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा कराने और जमीनी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के निर्देश दिए गए।
ये अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में जिला विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, सभी खंड विकास अधिकारी, सभी सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) और ग्राम पंचायत सचिव उपस्थित रहे।
बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि मियावाकी वृक्षारोपण और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए और निर्धारित समयसीमा में सभी आवश्यक कार्य पूरे किए जाएं।
गाजियाबाद प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य ग्राम पंचायतों में हरित क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ-साथ ठोस और तरल अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करना है। मियावाकी पद्धति से वृक्षारोपण और प्रभावी कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था के माध्यम से ग्राम पंचायतों को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

