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Sargan 3000: काला सागर में यूक्रेन का समुद्री ड्रोन, रूसी ड्रोन को किया तबाह

By yogesh jindoria | Published: Sep 13, 2026 10:58 AM

Sargan 3000: काला सागर में यूक्रेन ने रूसी समुद्री ड्रोन को बनाया निशाना

काला सागर: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर में समुद्री ड्रोन को लेकर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। यूक्रेनी नौसेना और रक्षा खुफिया इकाइयों ने रूसी मानवरहित सतह पोत यानी समुद्री ड्रोन को निशाना बनाकर नष्ट करने का दावा किया है। इस कार्रवाई में यूक्रेन के Sargan 3000 समुद्री ड्रोन की भूमिका बताई जा रही है।

यूक्रेन वर्ष 2022 से काला सागर में रूसी नौसैनिक ताकत को चुनौती देने के लिए ड्रोन तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। इस नई कार्रवाई को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ बड़े युद्धपोतों या अन्य समुद्री ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि दुश्मन के ड्रोन को रोकने के लिए भी किया जा रहा है।

रूसी ड्रोन को किया गया ट्रैक

रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी बलों ने काला सागर में एक रूसी मानवरहित सतह पोत को स्पॉट किया। इसके बाद यूक्रेनी समुद्री ड्रोन को कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि रूसी ड्रोन Orkan टाइप का था, जिसे आक्रामक अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।

यूक्रेनी पक्ष की कार्रवाई में Sargan 3000 ने रूसी ड्रोन को निशाना बनाया और उसे समुद्र में डुबो दिया। इस घटना को समुद्री युद्ध में ड्रोन बनाम ड्रोन मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है Sargan 3000?

Sargan 3000 यूक्रेन का बहुउद्देश्यीय मानवरहित समुद्री ड्रोन है, जिसे Sea Wolf के नाम से भी जाना जाता है। इसे Nordex द्वारा निर्मित बताया जाता है। यह रिमोट तरीके से संचालित किया जा सकता है और समुद्र में निगरानी तथा सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इस ड्रोन में Kongsberg Protector रिमोट वेपन स्टेशन का इस्तेमाल किया जाता है। यह सिस्टम नाटो के कई जहाजों पर भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके हथियार सिस्टम में 12.7 मिमी मशीन गन शामिल है, जो समुद्री लक्ष्यों के खिलाफ सटीक फायरिंग करने में सक्षम बताई जाती है।

1000 मीटर तक लक्ष्य पर निशाना

Sargan 3000 में लगे हथियार सिस्टम की मदद से करीब 1000 मीटर की दूरी से लक्ष्य को निशाना बनाया जा सकता है। रिमोट संचालन की वजह से ऑपरेटर को सीधे समुद्री क्षेत्र में जाकर कार्रवाई करने की जरूरत नहीं होती। इससे सैन्य कर्मियों के लिए जोखिम कम किया जा सकता है।

यूक्रेन पिछले कुछ वर्षों में मानवरहित समुद्री पोतों को अपनी युद्ध रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना चुका है। इनका इस्तेमाल रूसी नौसैनिक ठिकानों और युद्धपोतों पर दबाव बनाने के लिए किया गया है।

समुद्री युद्ध की बदलती रणनीति

काला सागर में हुई यह घटना समुद्री युद्ध की बदलती प्रकृति को भी दिखाती है। पहले समुद्री ड्रोन का मुख्य उद्देश्य बड़े जहाजों को निशाना बनाना माना जाता था, लेकिन अब इनका इस्तेमाल दुश्मन के मानवरहित सिस्टम को रोकने के लिए भी किया जा रहा है।

ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से समुद्री युद्ध में मानव सैनिकों के सीधे जोखिम को कम करने और दूर से लक्ष्य पर कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ी है। रूस और यूक्रेन दोनों ही युद्ध के दौरान ड्रोन तकनीक पर लगातार निर्भरता बढ़ा रहे हैं।

Sargan 3000 द्वारा रूसी समुद्री ड्रोन को निशाना बनाए जाने की घटना इसी बदलती रणनीति का उदाहरण मानी जा रही है। इससे आने वाले समय में काला सागर में मानवरहित समुद्री प्रणालियों के बीच मुकाबला और बढ़ने की संभावना दिखाई देती है।

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