नई दिल्ली: राष्ट्रमंडल खेल 2026 में देश का नाम रोशन करने वाले भारतीय पदक विजेताओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर मुलाकात की। इस दौरान खिलाड़ियों ने ग्लासगो में अपने अनुभव, संघर्ष और यादगार पलों को प्रधानमंत्री के साथ साझा किया। बातचीत के दौरान कई ऐसे भावुक और दिलचस्प किस्से सामने आए, जिन्होंने खिलाड़ियों की सफलता के पीछे छिपी मेहनत और देशभक्ति की भावना को उजागर किया।
भारत ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 39 पदक अपने नाम किए। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल रहे। सीमित खेल स्पर्धाओं के बावजूद भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।
मीराबाई चानू के आंसुओं में दिखा चार साल का संघर्ष
भारतीय भारोत्तोलक साईखोम मीराबाई चानू की कहानी ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत के दौरान खास भावुक मोड़ लिया। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मीराबाई पोडियम पर भावुक हो गई थीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने उनके आंसुओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा लगा जैसे उनके हर आंसू की बूंद से सोने का पदक निकल रहा हो।
मीराबाई ने बताया कि पेरिस ओलंपिक में पदक से चूकने के बाद उनके मन में उस प्रदर्शन का दर्द था। इसके बाद चोटों और पारिवारिक परेशानियों के बीच चार साल का सफर आसान नहीं रहा। जब ग्लासगो में वह पोडियम पर खड़ी हुईं, तिरंगा ऊपर उठता देखा और राष्ट्रगान बजा, तो वह अपने आंसू नहीं रोक सकीं।
प्रधानमंत्री ने उनकी जीत को व्यक्तिगत उपलब्धि से आगे बताते हुए कहा कि ऐसी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनती है।
लवलीना के सामने आया देशप्रेम का अलग अंदाज
मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने ग्लासगो में एक रेस्टोरेंट से जुड़ा किस्सा प्रधानमंत्री के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के अंतिम दिन भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी के बीच उन्हें वहां प्रदर्शित भारत के नक्शे को लेकर आपत्ति हुई।
लवलीना ने वहां मौजूद लोगों से विनम्रता से बात कर नक्शे को बदलने का अनुरोध किया। उनकी बात मान ली गई और नक्शे को बदल दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना को खिलाड़ियों की देशभक्ति से जोड़ते हुए कहा कि जीत के जश्न के बीच भी देश से जुड़ी बात पर ध्यान जाना उनकी गहरी राष्ट्रीय भावना को दर्शाता है।

जादूमणि ने कारगिल के शहीदों को समर्पित किया पदक
मुक्केबाज जादूमणि सिंह की कहानी भी इस मुलाकात में खास रही। राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाले जादूमणि ने बताया कि उनका मुकाबला पाकिस्तान के मुक्केबाज से हुआ था और उसी दिन कारगिल दिवस भी था।
भारतीय सेना में सेवा दे रहे जादूमणि ने मुकाबले में 5-0 से जीत दर्ज की और अपना पदक कारगिल के शहीदों को समर्पित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने उनके इस जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि एक सैनिक के रूप में उन्होंने जिस भावना के साथ पदक देश के वीर जवानों को समर्पित किया, उससे उनकी जीत का महत्व और बढ़ गया।
नरेंद्र बेरवाल ने सुनाया पाकिस्तान मुकाबले का किस्सा
हैवीवेट मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने प्रधानमंत्री को 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स से जुड़ा एक रोचक किस्सा बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के एक मुक्केबाज को हराने के बाद उसने उनके नाम, कोच के नाम और प्रधानमंत्री के नाम में समानता का जिक्र करते हुए कहा था कि उसे ‘नरेंद्र’ नाम से ही नफरत हो गई है।
इस किस्से पर बातचीत के दौरान माहौल हल्का और दिलचस्प हो गया।
PM मोदी बोले- खिलाड़ियों ने सिर्फ पदक नहीं, पूरी पीढ़ी तैयार की
प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। खिलाड़ियों ने देश के युवाओं के सामने नए लक्ष्य और संभावनाएं भी रखी हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में खेलों के महत्व पर भाषण देने से कहीं ज्यादा प्रभाव खिलाड़ियों के पदक और उनकी सफलता का होता है। उनकी उपलब्धियां बच्चों को खेलों से जुड़ने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करती हैं।
‘खेलो इंडिया’ को मजबूत करने पर जोर
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से ‘खेलो इंडिया’ की प्रतिष्ठा को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी खेल योजना की सफलता केवल कार्यक्रम आयोजित करने से नहीं, बल्कि तब दिखाई देती है जब युवा खेल को करियर के रूप में अपनाते हैं और खेल भावना के साथ मैदान में उतरते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को खेलों में अभी लंबा सफर तय करना है और आने वाले समय में कई और पदक देश के खाते में जोड़ने हैं।
सीमित स्पर्धाओं के बावजूद भारत का शानदार प्रदर्शन
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीते। भारत चौथे स्थान पर रहा।
इस बार कई ऐसे खेल प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं थे, जिनमें भारत की पदक जीतने की संभावनाएं मजबूत मानी जाती हैं। इसके बावजूद मुक्केबाजी, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स सहित कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए भरोसा जताया कि वे भविष्य में भी देश के लिए इसी तरह सफलता हासिल करते रहेंगे।
PM मोदी और भारतीय पदक विजेताओं की यह मुलाकात केवल जीत की बधाई तक सीमित नहीं रही। मीराबाई चानू के चार साल के संघर्ष, लवलीना बोरगोहेन की देशभक्ति और जादूमणि सिंह के कारगिल शहीदों के प्रति समर्पण ने भारतीय खेलों के पीछे मौजूद जज्बे की तस्वीर सामने रखी।
39 पदकों की उपलब्धि के साथ भारतीय दल ने साबित किया कि सीमित अवसरों के बावजूद मेहनत, अनुशासन और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। अब इन खिलाड़ियों की सफलता से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी खेल के मैदान में कितनी आगे बढ़ती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।