टीवी सीरियल ‘सूर्यपुत्र कर्ण’ एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। महाभारत के किरदार कर्ण को लेकर बने इस शो के एक पुराने सीन पर दर्शक सवाल उठा रहे हैं। खास तौर पर द्रौपदी के अपमान वाले प्रसंग में कर्ण को दुखी और रोते हुए दिखाए जाने को लेकर यूजर्स ने आपत्ति जताई है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि शो में कर्ण के चरित्र को मूल महाभारत से काफी अलग और ज्यादा आदर्श रूप में पेश किया गया। ‘सूर्यपुत्र कर्ण’ 2015 में सोनी टीवी पर प्रसारित हुआ था और इसमें कर्ण की कहानी को केंद्र में रखा गया था।
द्रौपदी के अपमान के वक्त रोता दिखा कर्ण
सीरियल में द्रौपदी के चीरहरण के प्रसंग के दौरान कर्ण को इस घटना से परेशान और दुखी दिखाया गया। कुछ दृश्यों में वह द्रौपदी के अपमान को लेकर भावुक नजर आता है। इसी प्रस्तुति को लेकर दर्शकों का एक वर्ग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहा है।
यूजर्स का तर्क है कि महाभारत के मूल कथानक में कर्ण की भूमिका को इस तरह प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी वजह से सीरियल में दिखाई गई कर्ण की छवि और मूल महाभारत के कर्ण के बीच अंतर को लेकर बहस छिड़ गई है।
मूल महाभारत में क्या थी कर्ण की भूमिका?
महाभारत के सभा पर्व में द्रौपदी के अपमान का प्रसंग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी घटना को लेकर टीवी और अन्य माध्यमों में अलग-अलग प्रस्तुतियां देखने को मिली हैं।
मूल महाभारत की व्याख्याओं में कर्ण को दुर्योधन का करीबी सहयोगी बताया गया है और द्रौपदी के अपमान के प्रसंग में उसकी भूमिका भी विवादित रही है। यही कारण है कि ‘सूर्यपुत्र कर्ण’ में उसे इस घटना से बेहद दुखी और द्रौपदी के सम्मान की चिंता करते हुए दिखाना कई दर्शकों को अलग प्रस्तुति लगा। हाल की एक अकादमिक समीक्षा ने भी नोट किया है कि इस सीरियल ने द्रौपदी के अपमान वाले प्रसंग में कर्ण की भूमिका को अधिक नैतिक और सकारात्मक रूप में पुनर्परिभाषित किया था।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उठाए सवाल
सीरियल के इस सीन को लेकर सोशल मीडिया और ऑनलाइन फोरम्स पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। कुछ दर्शकों ने कर्ण को अत्यधिक भावुक और आदर्शवादी दिखाने पर सवाल उठाए। एक पुराने ऑनलाइन चर्चा में यूजर्स ने खास तौर पर इस बात पर आपत्ति जताई थी कि द्रौपदी के अपमान के दौरान कर्ण को रोते और उसके सम्मान की चिंता करते हुए दिखाया गया।
कुछ यूजर्स ने महाभारत के प्रसंगों का हवाला देते हुए पूछा कि अगर सीरियल खुद को महाभारत की कहानी पर आधारित बताता है, तो कर्ण के विवादित पक्ष को इतना बदलकर क्यों पेश किया गया।
कर्ण को लेकर क्यों होती है बहस?
कर्ण महाभारत के सबसे जटिल और चर्चित किरदारों में से एक है। वह दुर्योधन का मित्र था और उसके प्रति अपनी निष्ठा के लिए जाना जाता है। साथ ही उसके जीवन में जन्म, पहचान, सामाजिक भेदभाव, मित्रता और धर्म के बीच संघर्ष जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं।
इसी जटिलता के कारण कर्ण को लेकर अलग-अलग टीवी सीरियल और फिल्मों में अलग-अलग व्याख्याएं देखने को मिली हैं। ‘सूर्यपुत्र कर्ण’ में भी उसके संघर्ष और सकारात्मक पक्ष पर ज्यादा जोर दिया गया, जिससे उसे एक महान और धर्मप्रिय योद्धा के रूप में पेश करने की कोशिश दिखाई देती है।
क्या मेकर्स ने कर्ण को जरूरत से ज्यादा सफेद दिखाया?
यही सवाल अब सोशल मीडिया पर उठ रहा है। दर्शकों का एक वर्ग मानता है कि कर्ण के दर्द और संघर्ष को दिखाना ठीक है, लेकिन उसके विवादित फैसलों और महाभारत में उसकी भूमिका को नजरअंदाज करके चरित्र को पूरी तरह निर्दोष दिखाना मूल कथा की जटिलता को बदल देता है।
वहीं, सीरियल के नजरिए से देखें तो यह एक टेलीविजन रूपांतरण था, जिसमें कहानी को नाटकीय और भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया। इसलिए कर्ण की छवि को लेकर विवाद सिर्फ एक सीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बड़े सवाल से जुड़ा है कि पौराणिक कथाओं को टीवी के लिए कितना बदला जा सकता है।