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लखनऊ फर्जी पुलिस अधिकारी अपहरण: कारोबारी से 13 लाख और जेवर वसूले, 6 गिरफ्तार

By yogesh jindoria | Published: Sep 20, 2026 11:23 AM

लखनऊ फर्जी पुलिस अधिकारी अपहरण: कारोबारी से 13 लाख और जेवर ऐंठे, 6 गिरफ्तार

लखनऊ: राजधानी लखनऊ के कृष्णानगर थाना क्षेत्र में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक कारोबारी का अपहरण करने और उसके परिवार से लाखों रुपये व जेवर वसूलने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि बदमाशों ने कारोबारी को फर्जी पुलिस आईडी दिखाकर जबरन कार में बैठाया और हथियार के बल पर बंधक बना लिया। इसके बाद उनकी पत्नी को फोन कराकर घर से नकदी और जेवर मंगवाए गए।

फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कारोबारी को बनाया निशाना

राजेंद्रनगर निवासी कारोबारी सुदर्शन घोष ने 13 सितंबर को कृष्णानगर थाने में अपहरण और फिरौती से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। कारोबारी के मुताबिक वह अपने दफ्तर की ओर जा रहे थे, तभी कुछ लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया। आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र दिखाकर उन्हें भरोसे में लिया और फिर जबरन अपनी कार में बैठा लिया।

कार में बैठाने के बाद आरोपियों ने कारोबारी के साथ कथित तौर पर मारपीट की और असलहे के बल पर उन्हें डराया-धमकाया। इसके बाद उनसे परिवार के लोगों से संपर्क कराने के लिए कहा गया।

पत्नी को फोन कर मंगाए 13 लाख रुपये और जेवर

पुलिस के मुताबिक, अपहरण के बाद आरोपियों ने कारोबारी से उनकी पत्नी को फोन कराया। फोन पर परिवार से बड़ी रकम और जेवर लाने के लिए कहा गया। इसके बाद कारोबारी के ड्राइवर के जरिए करीब 13 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवर मंगवाए गए।

रकम और जेवर मिलने के बाद आरोपियों ने कारोबारी को छोड़ दिया और मौके से फरार हो गए। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, कारोबारी को बाद में शहीद पथ के पास छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

पहले से कर रहे थे कारोबारी की रेकी

पुलिस की जांच में सामने आया कि यह वारदात अचानक नहीं हुई थी, बल्कि आरोपियों ने कारोबारी की पहले से रेकी की थी। गिरोह के कुछ सदस्य लखनऊ में रहकर कारोबारी की गतिविधियों और आने-जाने के रास्तों पर नजर रख रहे थे।

मौका मिलने के बाद आरोपियों ने फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कारोबारी को रोकने और अपहरण की योजना को अंजाम दिया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य पहचान छिपाने के लिए वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट का भी इस्तेमाल करते थे। वारदात के बाद आरोपी अलग-अलग राज्यों में चले गए थे।

220 से 240 CCTV फुटेज खंगालने के बाद खुलासा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए आठ विशेष टीमों के साथ सर्विलांस सेल को भी लगाया। टीमों ने घटनास्थल से लेकर आरोपियों के आने-जाने वाले रास्तों तक करीब 220 से 240 CCTV फुटेज खंगाले।

तकनीकी साक्ष्यों और पुलिस की मैनुअल जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनुराग, लवी कुमार, दीपांशु कुमार, अनुराग कुमार, आकाश चौधरी और मनीष कुमार के रूप में बताई गई है।

अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े होने का दावा

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी एक अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात के बाद आरोपी अलग-अलग राज्यों में भाग गए थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका और उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी जुटा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कारोबारी को निशाना बनाने के लिए आरोपियों को उसकी व्यक्तिगत और आर्थिक गतिविधियों की जानकारी कहां से मिली थी।

पुलिस कर रही है आगे की जांच

लखनऊ पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही वारदात में इस्तेमाल वाहनों, फर्जी पुलिस आईडी, हथियार और अन्य सामान के संबंध में भी जांच की जा रही है।

पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस गिरोह ने इससे पहले किसी अन्य कारोबारी या व्यक्ति को इसी तरह फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर निशाना बनाया था या नहीं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

 

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