इटावा में ऑनलाइन गेमिंग ठगी करने वाले साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश, 15 लाख रुपये समेत 3 गिरफ्तार
इटावा: ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग के जरिए लोगों को रातों-रात रकम दोगुनी-तिगुनी करने का लालच देकर ठगी करने वाले अंतरजनपदीय साइबर सिंडिकेट का इटावा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। एसओजी, सर्विलांस टीम और थाना सिविल लाइन पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक युवक, एक युवती और एक बाल अपचारी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से ठगी से अर्जित बताए गए 15 लाख रुपये नकद, चार मोबाइल फोन, डेल लैपटॉप समेत बड़ी संख्या में दस्तावेज और डिजिटल डाटा बरामद किया है।
स्कॉर्पियो से कानपुर की ओर जा रहा था गिरोह
पुलिस के मुताबिक, अपराध और साइबर ठगी पर रोक लगाने के लिए जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 4 अक्टूबर 2026 को सिविल लाइन क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्ति और वाहनों की चेकिंग की जा रही थी।
इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य काले रंग की स्कॉर्पियो से इटावा हाईवे होते हुए कानपुर की ओर जाने वाले हैं। सूचना के आधार पर बाइस ख्वाजा तिराहे के पास चेकिंग तेज की गई। इसी दौरान संदिग्ध स्कॉर्पियो को रोककर पुलिस ने एक युवक, एक युवती और एक बाल अपचारी को पकड़ लिया।
15 लाख रुपये और डिजिटल सामान बरामद
पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाशी ली तो उसमें से 15 लाख रुपये नकद बरामद हुए। इसके अलावा चार मोबाइल फोन, एक डेल लैपटॉप और उसका चार्जर, बैंक चेकबुक, विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट भी मिले।
जांच के दौरान पुलिस को ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित गेम आईडी, पासवर्ड, क्यूआर कोड, ग्राहकों की सूची और करोड़ों रुपये के डिजिटल वित्तीय लेनदेन से जुड़ा डाटा भी मिला। पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल की जा रही स्कॉर्पियो को भी सीज कर दिया है।
सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर फंसाते थे लोगों को
पूछताछ में पुलिस के अनुसार सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग साइटों के नाम से विज्ञापन प्रसारित करता था। लोगों को कम समय में रकम दोगुनी-तिगुनी करने का लालच दिया जाता था।
गिरोह के सदस्य फर्जी मोबाइल नंबरों के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ग्रुप के माध्यम से गेमिंग आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए जाते थे।
पुलिस के मुताबिक, ठगी के लिए फर्जी क्यूआर कोड और म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। जब कोई व्यक्ति अपनी जमा रकम निकालने की कोशिश करता था तो उसकी गेमिंग आईडी ब्लॉक कर दी जाती थी और खाते में जमा रकम हड़प ली जाती थी।
झांसी के सुमित साहू को बताया गया मुख्य सरगना
पुलिस जांच में झांसी निवासी सुमित साहू का नाम कथित तौर पर सिंडिकेट के मुख्य सरगना के रूप में सामने आया है। पुलिस के अनुसार सुमित फर्जी सिम उपलब्ध कराने, अलग-अलग शाखाओं के संचालन और ठगी की रकम के बंटवारे का प्रबंधन करता था।
पुलिस के मुताबिक, सुमित साहू पर झांसी में 25 हजार रुपये का इनाम घोषित है। सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के नाम भी जांच में सामने आए हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है।
अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते थे गिरोह के सदस्य
जांच के अनुसार, साइबर सिंडिकेट में शामिल अलग-अलग लोग अलग-अलग काम संभालते थे। कुछ सदस्य कॉलिंग टीम और शाखाओं का संचालन करते थे, जबकि अन्य फर्जी गेमिंग पैनल, पासवर्ड और क्यूआर कोड तैयार करने तथा सोशल मीडिया पर विज्ञापन प्रसारित करने का काम करते थे।
इसके अलावा ठगी की रकम मंगाने के लिए म्यूल बैंक खातों की व्यवस्था भी की जाती थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।
प्रांजल राय समेत तीन गिरफ्तार
पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें प्रांजल राय पुत्र अनिल कुमार, निवासी राजीव नगर, थाना प्रेम नगर, जनपद झांसी, उम्र करीब 23 वर्ष, एक अभियुक्ता और एक बाल अपचारी शामिल हैं।
मामले में थाना सिविल लाइन में बीएनएस, आईटी एक्ट, सार्वजनिक जुआ अधिनियम और पब्लिक गेम्बलिंग एंड ऑनलाइन गेमिंग प्रिवेंशन एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच के आधार पर गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पुलिस की कार्रवाई में सामने आए डिजिटल लेनदेन के डाटा से ठगी के दायरे और इससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिलने की उम्मीद है।