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₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? नए कानून ने बढ़ाई हलचल, जानिए सरकार का पूरा प्लान

नई दिल्ली। देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका UPI एक बार फिर चर्चा में है। वजह है डिजिटल भुगतान से जुड़े कानून में किया गया बदलाव। संसद में पेश और पारित संशोधन के बाद अब इस बात पर बहस तेज हो गई है कि क्या आने वाले समय में ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर शुल्क लगाया जा सकता है?

हालांकि सबसे पहले यह साफ कर देना जरूरी है कि फिलहाल UPI पेमेंट पर कोई नया चार्ज लागू नहीं हुआ है। यानी आज अगर कोई व्यक्ति QR कोड स्कैन करके भुगतान करता है या UPI के जरिए किसी व्यापारी को पैसे देता है, तो उसे पहले की तरह कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ रहा है।

आखिर नए कानून में क्या बदला?

6 अगस्त 2026 को लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया। इसके जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में बदलाव किया गया है।

पहले कानून में कुछ अधिसूचित डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर शुल्क नहीं लगाने का प्रावधान था। UPI, BHIM-UPI, UPI QR और RuPay डेबिट कार्ड को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया था।

अब संशोधन के बाद केंद्र सरकार को अधिसूचना के जरिए यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि किन डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर शून्य MDR जारी रहेगा और किन पर भविष्य में शुल्क लगाया जा सकता है।

इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि UPI पर चार्ज लग गया है। बल्कि सरकार के पास भविष्य में ऐसी व्यवस्था लागू करने का कानूनी विकल्प उपलब्ध होगा।

क्या ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज?

यही सबसे बड़ा सवाल है। फिलहाल सरकार ने ₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर शुल्क लगाने का कोई अंतिम फैसला नहीं किया है।

हालांकि, रिपोर्ट्स में संभावित मॉडल को लेकर चर्चा सामने आई है। इसके तहत ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3 से 0.5 फीसदी तक MDR लगाने का विकल्प बताया गया है। यह शुल्क सभी व्यापारियों पर लागू होगा या केवल बड़े कारोबारियों पर, इस पर भी अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक सालाना ₹1.5 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाले व्यापारियों को इस संभावित व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकता है। लेकिन यह फिलहाल एक प्रस्तावित विकल्प है, कोई लागू नियम नहीं।

MDR क्या होता है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी से लिया जाता है। भुगतान की प्रक्रिया में बैंक, पेमेंट नेटवर्क और अन्य तकनीकी संस्थाएं शामिल होती हैं। इस पूरी व्यवस्था को चलाने में होने वाली लागत की भरपाई के लिए MDR लिया जाता है।

UPI पर जनवरी 2020 से MDR शून्य रहा है। इसी वजह से ग्राहक और व्यापारी दोनों के लिए UPI भुगतान बेहद आसान और कम लागत वाला माध्यम बना।

सरकार क्यों कर रही है बदलाव?

UPI का इस्तेमाल लगातार तेजी से बढ़ा है। करोड़ों लोग रोजाना छोटे-बड़े भुगतान के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित रखने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने, सर्वर और तकनीकी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए लगातार निवेश की जरूरत पड़ती है।

इसी वजह से डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए किसी तरह का राजस्व मॉडल होना चाहिए।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए खर्च की जरूरत पर जोर दिया है। उनके अनुसार इसकी लागत सरकार टैक्स के जरिए उठा सकती है या भविष्य में यूजर-पे मॉडल पर भी विचार किया जा सकता है।

सरकार और विपक्ष के दावे अलग-अलग

इस बदलाव को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार मुफ्त UPI की कानूनी गारंटी को कमजोर कर रही है और भविष्य में आम लोगों पर इसका अप्रत्यक्ष बोझ पड़ सकता है।

वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि UPI पर तत्काल कोई शुल्क नहीं लगाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि MDR का संबंध मुख्य रूप से व्यापारियों से है, सीधे ग्राहकों से नहीं।

विपक्ष का तर्क है कि अगर व्यापारियों से शुल्क लिया गया तो वे इसकी भरपाई सामान और सेवाओं की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों से कर सकते हैं। ऐसे में अप्रत्यक्ष रूप से आम उपभोक्ता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

आम लोगों पर अभी क्या असर होगा?

फिलहाल आम UPI यूजर को परेशान होने की जरूरत नहीं है। ₹2,000 से ज्यादा या कम, किसी भी UPI भुगतान पर अभी कोई नया चार्ज लागू नहीं हुआ है।

अगर भविष्य में सरकार MDR लागू करने का फैसला करती है तो इसके लिए अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। उसी समय यह स्पष्ट होगा कि शुल्क किस तरह के लेनदेन पर लगेगा, कौन से व्यापारी इसके दायरे में आएंगे और ग्राहकों को इससे बाहर रखा जाएगा या नहीं।

यानी फिलहाल UPI पहले की तरह मुफ्त है, लेकिन नए कानूनी बदलाव ने भविष्य में शुल्क लगाए जाने की संभावना का रास्ता जरूर खोल दिया है। अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले और अधिसूचना पर रहेगी।

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