विश्व स्ट्रोक दिवस के सिलसिले में वॉकाथन आयोजित 

34

स्ट्रोक के बारे में जागरूकता कायम करने के लिए आयोजित वॉकाथन में स्ट्रोक को पराजित करने वाले मरीजों ने भी हिस्सा लिया

Noida Aone News/ Dinesh Bhardwaj :28 अक्तूबर, 2018 : विश्व स्ट्रोक दिवस की पूर्व संध्या पर आज नौएडा के सेक्टर 62 में फोर्टिस हास्पीटल के न्यूरोसर्जरी विभाग की ओर से वॉकाथन का आयोजन किया गया। इस वॉकाथन की अगुआई फोर्टिस हास्पीटल के न्यूरोसर्जरी विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. राहुल गुप्ता, न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योति बाला शर्मा तथा इमरजेंसी विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ. दिना जे. शाह ने की। इस मौके पर स्ट्रोक के बारे में जागरूकता कायम करने के लिए स्वास्थ्य चर्चा का भी आयोजन किया गया।

वॉकाथन में स्ट्रोक को पराजित करने वाले 20 मरीजों ने भी हिस्सा लिया और स्ट्रोक से उबरने के बारे में अपनी कहानी सुनाई। वॉकाथन में हिस्सा लेने वाले एक मरीज ने कहा,‘‘ हम इस वॉकाथन में भाग लेने को लेकर काफी उत्साहित थे। इस वॉकाथन में जो भी मरीज भाग ले रहे हैं उनमें से ज्यादातर स्ट्रोक के प्रभाव से पूरी तरह से उबर चुके हैं। मुझे उम्मीद है कि यह वॉकाथन अन्य लोगों को भी प्रेरित करेगा।

डॉ. राहुल गुप्ता ने कहा कि स्ट्रोक से उबरने वाले ये लोग अब सक्रिय जीवन जी रहे हैं। यह इस बात को साबित करता है कि समय पर समुचित इलाज की मदद से स्ट्रोक के मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। स्ट्रोक पर विजय पाने वाले ये मरीज इस बात के सबूत हैं कि समय पर इलाज से स्ट्रोक को ठीक किया जा सकता है।

डॉ. राहुल गुप्ता ने कहा, ‘‘स्ट्रोक किसी भी व्यक्ति को, किसी भी उम्र में हो सकता है। कोई भी वर्ग इससे अछूता नहीं है। यह महिला और पुरुष दोनों को हो सकता है। आज चिंता की बात यह है कि स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं और स्ट्रोक होने की उम्र घट रही है। आज स्ट्रोक के 12 प्रतिशत मरीज 40 साल से कम उम्र के होते हैं। जो लोग उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च रक्त कालेस्ट्रॉल से ग्रस्त हैं उन्हें स्ट्रोक होने का खतरा अधिक हो सकता है। गर्भनिरोधक दवाइयां लेने वाली महिलाओं को इसका अधिक खतरा होता है।

डॉ. ज्योति बाला शर्मा ने कहा कि आज इस बात को लेकर जागरूकता कायम किए जाने की जरूरत है कि स्ट्रोक को रोका जा सकता है और इसका इलाज किया जा सकता है।

डॉ. दीना शाह ने कहा, ‘‘भारत में स्ट्रोक खतरनाक दर से बढ़ रहा है, खास तौर पर युवकों में और इसका मुख्य कारण बढ़ता तनाव, खराब खान-पान एवं स्थूल जीवन शैली है। अगर स्ट्रोक का उपचार नहीं हो तो इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को काफी क्षति पहुंच सकती है और इसके कारण शरीर का कोई अंग काम करना बंद कर सकता है या बोलने में दिक्कत हो सकती है।

दुनिया भर में स्ट्रोक की रोकथाम और उसकी चिकित्सा के बारे में जागरूकता कायम करने के लिए 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस का आयोजन किया जाता है।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Themetf