एससी एक्ट बिल के विरोध में आरक्षण विरोधी पार्टी ने देश के कई शहरो से प्रधान मंत्री, महामहिम राष्ट्रपति एवं सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को सौंपा ज्ञापन

43

Faridabad Aone News/ Dinesh Bhardwaj :आरक्षण विरोधी पार्टी द्वारा घोषित एवं देश के विभिन्न संगठनो द्वारा समर्थिक भारत बंद का आयोजन पूर्णतया शांतिपूर्ण  एवं सफल रहा बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश,राजस्थान में पार्टी कर्ताकर्ताओं में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया एवं माननीय प्रधान मंत्री जी , महामहिम राष्ट्रपति जी एवं सुप्रीम कोर्ट के मुख्या न्यायाधीश के नाम सक्षम पीठासीन अधिकारियों ज्ञापन सौंपे घटनाओं को छोड़ कर कहीं से कोई अप्रिय समाचार नहीं मिला है

आरक्षण विरोधी पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष श्री संजय शर्मा जी ने जंतर मंतर दिल्ली पहुँच कर पार्टी के अन्य प्रदेशो के प्रभारियों मध्यप्रदेश प्रभारी श्री चन्द्र प्रकाश भटनागर, जम्मू प्रभारी श्री सत्यपाल शर्मा, महाराष्ट्र प्रभारी श्री इन्द्रजीत सिंह मालिक, एवं अन्य प्रदेशों की कार्यकारिणी के पदाधिकारियों तथा राष्ट्रिय पदाधिकारियों श्री प्रताप शर्मा, श्री दीपक गौड़, श्री संजय सहाय, श्री पंकज त्रेहन एवं अन्य सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आन्दोलन का नेतृत्व किया

श्री शर्मा आन्दोलन के दौरान जंजीरों में जकड कर मंच पर मौजूद रहे उन्होंने कहा मोदी सरकार द्वारा एससी एक्ट में किये गए नए प्रावधानों का विरोध करती है

  1. बिना सत्यता अथवा घटना की जांच किये  अथवा मेडिकल के सुचना मिलते ही किसी भी निर्दोष व्यक्ति को तुरंत  गिरफ्तार कर जेल भेजना एवं 6 महीने तक उसको जमानत न मिलना बहुत ही क्रूर एवं तालिबानी हुक्म है यह दुर्भाग्य है इस देश का और इस देश के वासियों का जिनको ऐसा क्रूर शाशक मिला ऐसे शाशक के विरुद्ध आरक्षण विरोधी पार्टी तब तक मजबूती से खड़ी रहेगी जब तक उसे गद्दी से नहीं उतार देती
  2. मोदी सरकार द्वारा केश दर्ज करवाने के एवज में 8 लाख 50 हज़ार तक दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि झूठे केशों को बढ़ावा देगी बिना मेहनत मोटी रकम कमाने के लालच ने कोई भी व्यक्ति किसी झूठी घटना की मनगढ़ंत कहानी बना किसी भी निर्दोष व्यक्ति के जीवन को तबाह कर सकता है जिससे झूठे मामलों में बेहताशा वृद्धि होगी आरक्षण विरोधी पार्टी इस काले कानून की घोर निंदा करती है जिसमे किसी निर्द्होश व्यक्ति के जीवन को बर्बाद करने का पूरा प्रावधान किया गया है
  3. झूठे मामले दर्ज न हों इसके लिए मोदी जी द्वारा कोई प्रावधान या दंड का विधान नहीं किया है जिससे यह प्रमाणित होता है की मोदी जी देश के जनरल एवं ओबीसी वर्ग को पूरी तरह बर्बाद करना चाहते हैं या मजबूर करना चाहते हैं कि यदि वे अपना अस्तित्व बचाना चाहते हैं तो वे देश छोड़ कर चले जाए आरक्षण विरोधी पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने शपथ ली है की चाहे उनको अपनी नींद त्यागनी पड़े या भूखे रहना पड़े परन्तु ऐसी सरकार को पूर्णतया उखाड़ फैंकने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे

श्री शर्मा ने कहा उनकी पार्टी कांग्रेस का भी पुरजोर विरोध करेगी क्योंकि जिस मंच पर बैनरों पर लिखा था “सवर्ण हिन्दुओ भारत छोडो ” उस मंच पर बैठ कर राहुल गाँधी आज उनका समर्थन कर रहे थे अर्थात राहुल गाँधी भी यही चाहते हैं कि सवर्ण हिन्दू भारत छोड़कर चले जाएँ

आरक्षण विरोधी पार्टी ऐसे लोगों को बेनकाब करेगी और इनके विरुद्ध अपना प्रचार अभियान जारी रखेगी सवर्णों को जगाने का कार्य करेगी जबतक ऐसे जातिवादी जहर घोलने वाले नेताओं को हासिये पर नहीं पटका जाएगा तब तक देश में प्रेम और सौहार्द का वातावरण संभव नहीं है

ज्ञापन की प्रति

सेवा में

श्रीमान प्रधानमंत्री महोदय

भारत सरकार।

प्रेषकः आरक्षण विरोधी पार्टी।

महोदय,

निवेदन यह है कि 9 अगस्त को जनरल और ओबीसी वर्ग और देश के विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा शांतिपूर्वक तरीके से भारत बंद किया गया है। आरक्षण विरोधी पार्टी ने इसका आवाहन किया है, इस मौके पर आरक्षण विरोधी पार्टी द्वारा संसद भवन मार्ग और देश भर में जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रर्दशन किया गया और जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री और माननीय मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपा जा रहा है। इस बंद के माध्यम से हाल ही में देश की राज्यसभा और लोकसभा में एससी-एसटी एक्ट जैसा दोहरा कानून पास किया गया है, जिसको बिलकुल खत्म करके एक नागरिक एक कानून बनाए जाने की मांग की जा रहीं है। गौरतलब है कि एसीसी एक्ट में र्निदोष लोगों को फसाया जा रहा है, पिछले दिनों जो सुप्रीम कोर्ट का एससी एक्ट में संसोधन का निर्णय आया है हम उसका स्वागत करते हैं और इस तरह के जातिगत द्वेष फैलाने वाले कानून को बिलकुल समाप्त

करने की मांग करते हैं।

उल्लेखनीय है कि अपने राजनैतिक

 

हित साधने के लिए 1989 में राजीव गांधी की सरकार में इस हरिजन एक्ट को पास कराया था, लेकिन इसके बाद वे और उनकी पार्टी सत्ता से बेदखल हो गए थे। पिछली कांग्रेस सरकार ने 2012 में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को धता बताकर प्रोमोशन में आरक्षण का बिल इसी संसद में पास कराया जिसके कारण देश के जनमानसस ने उन्हें भी सत्ता से बेदखल कर दिया था, आज फिर मोदी साहब आपकी सरकार ने बही भूल की है, आपने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेषों को रद्द करने का काम करके देश की 82 प्रतिशत जनता के साथ विश्वासघात किया है। अगर आपने अपने इस निर्णय को नहीं पलटा तो भयंकर परिणाम आने वाले 2019 के चुनावों में आपको भुगतने पड़ सकते हैं। दूसरी बात क्या सामान्य वर्ग के लोग क्या वोट नहीं डालते अगर उनको वोट डालने का अधिकार है तो उसी सीट पर चुनाव लड़ने का अधिकार क्यूं नहीं है। क्यूं देश की संसद की 131 सीटें और विधानसभा की 1325 सीटें सिर्फ एससी-एसटी के लिए रिर्जव की  हुई हैं। इनको तुरंत प्रभाव से सामान्य घोषित करके सामान्य वर्ग के साथ न्याय किया जाए। इस सरकारी भेदभाव के चलते देश में वर्ग संर्घष पनप रहा है, जो एक दिन गृहयुद्ध का कारण बनेगा। आरक्षण नीति भारत के नागरिकों के समानता के संबैधानिक अधिकार के विपरीत है, बार-बार संबिंधान संसोधन करके

देश के राजनेता संबिधान की मूल भावना से भटक गए हैं और इस नीति को वोट बैंक बनाए रखने के लिए बेतुके तरीके से देष में लागू रखना चाहते हैं। इस नीति से देश का बेडा गर्क किया जा रहा है, अयोग्य लोगों को डाक्टर, इंजिनीयर और वैज्ञानिक बनाकर राष्ट्र की तरक्की में बडी रूकाबट पैदा की जा रही है।

दूसरी तरफ हरिजन एक्ट के कारण आरक्षित और अनारक्षित समाज के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो रही है, समाज को बांटने वाले इस कानून से देश वर्ग संघर्ष की ओर बढ़ रहा है। किसी जाति या वर्ग को विशेष अधिकार व सुविधाएं देना सामाजिक न्याय के खिलाफ है। संसद के शीतकालीन सत्र में हरिजन एक्ट और आरक्षण नीति को समाप्त किया जाए नही तो पब्लिक में असंतोष इतना बढ गया है कि इस मुद्दे पर एक बड़ा आंदोलन होने जा रहा है, अगर इस अगले संसद स़त्र में एससी एसटी  एक्ट और आरक्षण विरोधी बिल नहीं जाया जाएगा तो एवीपी पार्टी कार्यकर्ता अनिष्चित कालीन अनषन करेंगे।

हम आपका ध्यान इस ओर लाना चाहते हैं कि जो व्यक्ति एक बार सरकारी नौकरी पा चुका है फिर वो किस आधार पर गरीब, पिछड़ा या दलित हो सकता है, माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखकर उसे प्रोमोषन में आरक्षण क्यूं, जबकि 2012 में राज्यसभा में एक ऐसा ही विधेयक पारित किया गया, जो देश में कामचोरों और अयोग्य अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोमोट करके उच्च पदों पर

भेजा जाऐगा। देष में लाखों गरीब भूख से मर जाते हैं, तब कोई भी सांसद या मंत्री सरकारी कोष का मुंह खोलने के लिए कभी बकालत नहीं करता। लेकिन वोट बैंक के गंदे लालच के लिए देष व समाज को जातियों में बांटने के लिए, हरिजन एक्ट और जातिगत आरक्षण की वकालत सब करते है। ज्ञात रहेे कि देष में वंचित और षेषितों के नाम पर आरक्षण नीति लागू करतेे समय इसे सिर्फ 10 साल के लिए किया गया था, लेकिन इसके बाद राजनैतिक पार्टियों ने अपने वोट बैंक को बनाए रखने के लिए इस नीति को सिर्फ इस्तेमाल किया है, और सरकारें इसके मूल उददेश्य से भटक गई, विभिन्न रातनैतिक पार्टियों के सांसदो द्वारा अपने राजनैतिक हितों को साधने और अपने वोट बैंक को बनाए रखने के लिए लिए बार-बार संबिधान संसोधन करके आरक्षण को बढाते रहना एक अनेतिक व् अमानवीय कदम है, आरक्षण विधेयक को लेकर समय-समय पर न सिर्फ संबिधान संसोधन होता है,बल्कि

नित नई जातियों को पिछड़ा घोषित करने की होड़ सी लगी हुई है, जो जनहित में नहीं है, अतः ऐसे बिलों को संसद में लाकर जन-भावनाओं को भड़काने का काम न किया जाए, जिसमंे देश के सभी नागरिकों को समानता की दृष्टि से न देखा जा रहा हो। इससे देष में वर्ग संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाएगी। देष की जनता इस ज्यादिती को बर्दास्त नहीं करेगी। सडक़ से लेकर संसद तक इसका विरोध होगा। अतः आपसे निवेदन है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ऐसे जाति और वर्ग विषेश के हितों के लिए विधेयकों को संसद में न लाए जाने के लिए कोई ठोस नियम बनाऐं तथा सभी तरह के आरक्षणों को तुरंत समाप्त कराने की पहल करें व संविधान में प्रदत्त संमानता के अवसर उपलब्ध कराने की गारंटी को सख्ती से लागू किया जाए और संसद में समान अधिकारों के कानून बनें। अगर आरक्षण बाकई

 

गरीबों और पिछडों के लिए था, तो जब गरीबी जाति देखकर नहीं आती तो आरक्षण जाति और धर्म के आधार पर क्यों दिया जा रहा हैं, इसे तुरंत बंद होना चाहिए। मौजूदा जातिगत आरक्षण का लाभ अमीर लोग, नेता, मंत्री और बरिष्ठ अधिकारी ही पीढ़ी दर पीढ़ी उठा रहे हैं। पिछलेे 65 साल से जो समाज शोषित और वंचित है, उसे इसका कोई लाभ नहीं होने दिया, इसलिए शोषित, वंचित और गरीब लोगों को आर्थिक मदद की जरूरत है, न कि आरक्षण की।

आरक्षण के द्वारा योग्य प्रतिभाओं का हक छीनकर अयोग्य व नाकारा व्यक्तियों को दिया जा रहा है। जिससे प्रतिभाआंे का भविष्य चौपट हो रहा है। एक तरफ पदोन्नति में आरक्षण से जहां अधिकारी और कर्मचारी त्रस्त हैं, वहीं सामान्य वर्ग के विद्यार्थी अच्छे अंक लाने के बाद भी मेडीकल या इंजिनिरिंग यहां तक कि ग्रेजुएषन करने के लिए भी दाखिला नहीं ले पा रहे है। आरक्षण के द्वारा फारवर्ड वर्ग के विद्यार्थियों से शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार छीना जा रहा है। आरक्षण विरोधी पार्टी (रजि0)  की सरकार से मांग है कि हरिजन एक्ट और आरक्षण समाप्त करवाने की पहल करें। देश में लागू आरक्षण, संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार अवसर की समानता का खुला उलंघन है, स्वस्थ प्रतियोगिता का मजाक तथा सामाजिक न्याय के खिलाफ है। इस बंद के माध्यम से आरक्षण और एससी एक्ट जैसे जाति आधारित दोहरे कानूनों को बिलकुल खत्म करके एक नागरिक एक कानून बनाए जाने की मांग की जा रहीं है।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Themetf