बर्फीली हवाओं से दिलाएगा राहत दिलाएगी ग्‍लोबल वार्मिंग : ट्रंप

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अमेरिका का पूर्वी क्षेत्र इन दिनों कड़ाके की सर्दी से गुजर रहा है। सर्द हवाओं ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्‍त-व्‍यस्‍त कर दिया है,लेकिन अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इस मौके का इस्‍तेमाल ग्‍लोबल वार्मिंग पर तंज कसने के लिए किया। उन्‍होंने मजाकिया लहजे में कहा कि धरती के बढ़ते तापमान से शायद कड़ाके की सर्दी से निपटने में मिल सके।

अमेरिका के पूर्वी राज्‍यों में ठंड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मिनेसोटा वाटरफॉल पूरी तरह से जम गया है। इन सबके बीच अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, ‘पूरब में नववर्ष की पूर्व संध्‍या पर रिकॉर्ड ठंड हो सकती है। ग्‍लोबल वार्मिंग से शायद हमें इस ठंड से जूझने में मदद मिले, जिससे धरती को बचाने के लिए हमारा देश अरबों-खबरों डॉलर का भुगतान करता है।’
‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उर्त्‍सन करने वाला देश है और धरती के तापमान को बढ़ाने वाले कारकों में ग्रीनहाउस गैस का बड़ा योगदान है। ट्रंप जोर देकर कहते रहे हैं कि ‘ग्‍लोबल वार्मिंग’ की अवधारणा वास्‍तव में चीन की ओर से प्रचारित प्रॉपगैंडा है। इसी सोच के तहत उन्‍होंने जलवायु परिवर्तन पर ऐतिहासिक पेरिस समझौते से अमेरिका को अलग करने का फैसला लिया।

ट्रंप के इस फैसले की दुनियाभर में आलोचना हुई। घरेलू स्‍तर पर भी उनका विरोध हुआ। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री और 2016 के राष्‍ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्‍मीदवार रहीं हिलेरी क्लिंटन ने अमेरिका के इस कदम को ‘ऐतिहासिक भूल’ करार दिया।

पेरिस समझौता अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुआ था और उन्‍होंने इस मुद्दे पर दुनियाभर के देशों को साथ लाने में अहम भूमिका निभाई थी।

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