निर्मल गंगा के दावे खोखले, लगातार गिर रहा नाले का गंदा पानी

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नई दल्ली: जनपद में विभिन्न स्थानों पर आज भी गंगा में नालों का गंदा पानी डाला जा रहा है। तमाम शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन आज तक इस पर रोक नहीं लगा सके है। गंगा में गिर रहा नाले का पानी उसके निर्मल जल को द्रव, बना रहा है और अधिकारी विकास किए जाने का ढोल पीट रहे हैं। नमामि गंगे-गंगा विचार मंच के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहसंयोजक ने इस मामले की पोल खोली है। घाट किनारे जैसे-जैसे नाव आगे बढ़ती है, नालों से तमाम गंदा पानी गंगा में मिलते हुए देखा जा सकता है. उसी गंगा नदी में जिसे मोक्षदायिनी बताया जाता है. नालों से प्लास्टिक, कंकाल, कूड़ा-करकट, ऐसी कौन सी गंदगी नहीं है जो गंगा में आकर नहीं मिलती. इस जहरीले पानी से उठने वाली दुर्गन्ध जहां बर्दाश्त की सीमा से बाहर है, वहीं इसके साथ आने वाले रोगाणुओं का खतरा भी कम छोटा नहीं जो मानव और पशुओं के मल-मूत्र के जरिए साथ आते हैं. नमामि गंगे-गंगा विचार मंच के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहसंयोजक ने इस मामले की पोल खोली है। शनिवार सुबह उन्होंने गंगा ग्राम घोषित पूठ के निकट गंगा में गिर रहे नाले की फोटो और वीडियो फुटेज मुख्यमंत्री और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को भेजकर उन्हें वास्तविकता की जानकारी दी।

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