ओह्ह्ह!!! तो इस वजह से होती है ‘प्रसव’ के समय महिलाओं की मौत

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उत्तरप्रदेश। आज भी ‘पोस्टपार्टम हैमरेज’ यानि प्रसव के दौरान या बाद में रक्तस्राव होने से महिलाओं की मौत चिन्ता की बात है. ये खुलासा एक जान्च के दौरान हुआ. इस जान्च में प्रसव के दौरान हुई 90 महिलाओं की मौत का विश्लेषण किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थागत प्रसव के बजाय घरों में प्रसव करवाने से मौत की आशंका सात गुना तक बढ़ जाती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल 5.29 लाख महिलाएं इसी वजह से प्रसव के दौरान मौत के मुंह में समा जाती हैं और इनमें 1.36 भारतीय महिलाएं होती हैं. आमतौर पर मातृत्व मृत्यु दर में ऐसी महिलाओं की मौतों को शामिल किया जाता है, जिनकी मौत गर्भावस्था, प्रसव के दौरान या प्रसव के 42 दिन के भीतर हुई हो.

सभी 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की थीं. वहीं, जनगणना 2011 के अनुसार लखनऊ की क्रूड बर्थ रेट 29.7 प्रतिशत और मातृत्व मृत्यु दर 359 प्रति एक लाख जीवित प्रसव थी. हालांकि यह भी माना जाता है कि 25 से 40 प्रतिशत मौतों के वास्तविक कारण दर्ज नहीं किए जाते हैं.

Aonenewstv.com [Edited by- Megha Verma]

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