आज है सावन की शिवरात्रि, गुरुपुष्य योग का भी है संयोग, इस समय जल चढ़ाएं कांवड़िए

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नई दल्ली: आज है सावन की शिवरात्रि। साल में दो शिवरात्रि होती हैं पहली महाशिवरात्रि और दूसरी सावन की शिवरात्रि। कहते हैं कि भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शिव का महीना है सावन। सावन की शिवरात्रि के दिन कांवडिए गंगाजल लाकर भागवान शिव का अभिषेक करते हैं। ज्योतिष के अनुसार इस दिन गुरुवार, त्रयोदशी और पुष्य योग लगने से गुरुपुष्य योग भी लग रहा है। इसलिए इस शिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन भगवान शिव के भक्त  गंगाजल, दूध, दही, घी, पंचामृत के साथ भागवान शिव का रूद्राभिषेक किया जाता है। वहीं इस दिन कांवडिए  हरिद्वार से लाए गए गंगाजल से भोले बाबा का जलाभिषेक करते हैं। मासशिवरात्रि हर माह आती है। लेकिन यह तिथि चूंकि श्रावण मास में आ रही है इसलिए विशेष है। शिवभक्त शिव की विशेष पूजा चार पहर में कर सकते हैं। भगवान शिव को गृहस्थ का देवता माना जाता है। लड़किया अच्छा पति पाने के लिए भगवान शिव की पूजा करती हैं तो वहीं महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए उनके व्रत रखती हैं। सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय होता है। इसी महीने में भोलेनाथ और मां पार्वती का विवाह हुआ था। इस बार सावन की शिवरात्रि श्रावण 9 अगस्त यानि आज मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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