आज आदी रात को दिखेगा सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण

33

नई दल्ली: इस सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण शुक्रवार (27 जुलाई/आषाढ़ शुक्ल पुर्णिमा) को लगने वाला है। इस ग्रहण का स्पर्श और मोक्ष (शुरुआत और समाप्ति) दोनों  भारत में दिखेंगे। भारतीय समयानुसार चंद्रग्रहण रात 11:54 बजे  शुरू होगा।  इसका मध्य  रात 1:52 बजे होगा। जबकि यह रात 2:43 बजे समाप्त हो जायेगा। ज्योतिषविदों के अनुसार इस चंद्रग्रहण की पूर्ण अवधि 3 घंटे और 55 मिनट की है। वहीं, इसका सूतक नौ घंटे पहले (दोपहर 2:45 बजे) ही लग जायेगा। इस पर दुनियाभर की निगाहें टिकी हैं। भारत में पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा। देशभर के कई इलाके में पूर्ण चंद्रग्रहण को देखने के लिए कई तरह के इंतजाम किए गए हैं। बताया जा रहा है कि भारत में चंद्रग्रहण का असर देर रात 10.53 बजे से ही दिखना शुरू हो जाएगा।

भारत में देर रात से चंद्रग्रहण का असर दिखना शुरू हो जाएगा। धीरे-धीरे चांद का रंग लाल होता जाएगा और एक समय ऐसा आएगा जब चांद पूरी तरह से गायब हो जाएगा।

शुक्रवार देर रात 10.53 बजे – चांद पर ग्रहण का असर शुरू होगा, हालांकि नंगी आंखों से कुछ नहीं दिखेगा।

11.54 बजे – धीरे-धीरे ग्रहण का असर नंगी आंखों से देख पाएंगे।

देर रात 1.51 बजे – चंद्रग्रहण अपने सर्वोच्च स्तर पर होगा, ये ही पूर्ण चंद्रग्रहण होगा।

2.43 बजे – धीरे-धीरे ग्रहण का असर कम होगा।

शनिवार सुबह 5.00 बजे – चंद्रग्रहण का असर खत्म होगा।

चंद्रग्रहण के कारण ही देशभर के कई बड़े मंदिर दोपहर बाद ही बंद हो जाएंगे। हरिद्वार, वाराणसी और इलाहाबाद में हर शाम होने वाली गंगा आरती भी दोपहर को होगी। चंद्रग्रहण के कारण ही दोपहर एक बजे गंगा आरती का विशेष आयोजन किया जाएगा। देश के कई बड़े मंदिरों में दोपहर 2:00 बजे के बाद दर्शन नहीं हो पाएंगे।

कोलकाता के पंडित दीनबंधु उपाध्याय के अनुसार इस चंद्रग्रहण का मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि पर चंद्रग्रहण का अच्छा असर पड़ेगा। वहीं मिथुन, तुला, मकर और कुंभ राशि पर ठीक प्रभाव नहीं रहेगा। इसके अलावा वृषभ, कर्क, धनु और कन्या पर चंद्रग्रहण का प्रभाव मिश्रित रहेगा. इसीलिए जिन राशियों के लिए ये शुभ फल देनेवाला नहीं है, वो भी कुछ उपाय करके इसके दुष्प्रभाव से बच सकते हैं। बदरीनाथ और केदारनाथ मन्दिर के कपाट शुक्रवार दोपहर से शनिवार सुबह तक बन्द रहेंगे। ऐसा चंद्रग्रहण के कारण हो रहा है। चंद्रग्रहण की अवधि में मन्दिर में पूजा पाठ भी नहीं होगी। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मन्दिर समिति के पीआरओ डा. हरीश गौड ने यह जानकारी देते हुए बताया कि चंद्र ग्रहण के सूतक काल से पहले 27 जुलाई को श्री बदरीनाथ मंदिर के कपाट दिन में 12 बजकर 30 मिनट एवं श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट दिन में 2 बजकर 54 मिनट पर बंद हो जाएंगे।

दूसरे दिन सुबह ग्रहण समाप्त होने के बाद नियमित पूजा अर्चना के लिए उन्हें फिर से खोल दिए जायेंगे। चंद्र ग्रहण का आरंभ रात्रि 11 बजकर 54 मिनट पर हो रहा है, ग्रहण काल 28 जुलाई प्रात: 3 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, 28 जुलाई को श्री बदरीनाथ मंदिर एवं श्री केदारनाथ मंदिर प्रात: काल अपने निर्धारित समय पर दर्शनार्थ खुलेंगे।

चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन पड़ता है लेकिन हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं पड़ता है। इसका कारण है कि पृथ्वी की कक्षा पर चंद्रमा की कक्षा का झुके होना। यह झुकाव तकरीबन 5 डिग्री है इसलिए हर बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश नहीं करता। उसके ऊपर या नीचे से निकल जाता है। यही बात सूर्यग्रहण के लिए भी सच है।

सूर्यग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन होते हैं क्योंकि चंद्रमा का आकार पृथ्वी के आकार के मुकाबले लगभग 4 गुना कम है। इसकी छाया पृथ्वी पर छोटी आकार की पड़ती है इसीलिए पूर्णता की स्थिति में सूर्य ग्रहण पृथ्वी के एक छोटे से हिस्से से ही देखा जा सकता है। लेकिन चंद्र ग्रहण की स्थिति में धरती की छाया चंद्रमा के मुकाबले काफी बड़ी होती है। लिहाजा इससे गुजरने में चंद्रमा को ज्यादा वक्त लगता है। 

– ग्रहण काल में पति-पत्नी को दाम्पत्य संबंध बनाने से बचना चाहिए. ग्रहण के समय बने संबंध से उत्पन्न होनेवाली संतान को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।

– ग्रहण काल में पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए, केवल मानसिक जाप करने का विधान है ।

– ग्रहण से पहले पका हुआ भोजन खालेना चाहिए ग्रहण के बाद नहीं खाना चाहिए।

– गर्भवती स्त्री को ग्रहण काल में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. वरना गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर हो सकता है।

#aonenewstv

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Themetf